नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), अहमदाबाद एवं भारतीय संविधान के तहत राजभाषा संबंधी प्रावधानों का विस्तृत अवलोकन।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार देश के विभिन्न नगरों में जहां केंद्र सरकार के 10 या उससे अधिक कार्यालय स्थित हैं, वहां नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) का गठन किया जाता है। अहमदाबाद में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों में भारत सरकार की राजभाषा नीति के सुचारू अनुपालन, समीक्षा और आपसी समन्वय हेतु इस समिति की स्थापना की गई है।
Town Official Language Implementation Committee (TOLIC) is constituted under the instructions of the Department of Official Language, Ministry of Home Affairs, Government of India. TOLIC Ahmedabad serves as an active bridge between member organizations, organizing half-yearly reviews, joint workshops, technical seminars, and annual awards.
राजभाषा विभाग के दिनांक 22.11.1976 के का.ज्ञा.सं-1/14011/12/76-रा.भा. (का-1) के अनुसार देश के उन सभी नगरों में जहां केंद्रीय सरकार के 10 या इससे अधिक कार्यालय हों, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किया जा सकता है । समिति का गठन राजभाषा विभाग के क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालयों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर भारत सरकार के सचिव(राजभाषा) की अनुमति से किया जाता है ।
केंद्रीय सरकार के देश भर में फैले हुए कार्यालयों/उपक्रमों/बैंकों आदि में राजभाषा के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने और राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के मार्ग में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक संयुक्त मंच की आवश्यकता महसूस की गई ताकि वे मिल-बैठकर सभी कार्यालय/उपक्रम/बैंक आदि चर्चा कर सकें । फलतः नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों के गठन का निर्णय लिया गया । इन समितियों के गठन का प्रमुख उद्देश्य केंद्रीय सरकार के कार्यालयों/उपक्रमों/बैंकों आदि में राजभाषा नीति के कार्यान्वयन की समीक्षा करना इसे बढ़ावा देना और इसके मार्ग में आई कठिनाइयों को दूर करना है ।
नगर में स्थित केंद्रीय सरकार के कार्यालय/उपक्रम/बैंक आदि अनिवार्य रूप से इस समिति के सदस्य होते हैं । उनके वरिष्ठतम अधिकारियों(प्रशासनिक प्रधानों) से यह अपेक्षा की जाती है कि वे समिति की बैठकों में नियमित रूप से भाग लें ।
इन समितियों की अध्यक्षता नगर विशेष में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों/उपक्रमों/बैंकों आदि के वरिष्ठतम अधिकारियों में से किसी एक के द्वारा की जाती है। अध्यक्ष को राजभाषा विभाग द्वारा नामित किया जाता है। नामित किए जाने से पूर्व प्रस्तावित अध्यक्ष से समिति की अध्यक्षता के संबंध में लिखित सहमति प्राप्त की जाती है।
भारतीय संविधान के भाग-17 में अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा हिंदी के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है:
संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा।
राष्ट्रपति द्वारा राजभाषा आयोग का गठन तथा संसद की राजभाषा समिति द्वारा संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रगामी प्रयोग की समीक्षा।
संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
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स्थान : सैक सभागार, अहमदाबाद / SAC Auditorium
09 - 10 July 2026अहमदाबाद नगर सदस्य कार्यालय / Member Offices
July 2026विभिन्न भाषाई प्रतियोगिताएं / Various Competitions
September 1 - 14मुख्य समारोह एवं पुरस्कार वितरण / Main Function & Awards
September 14
भारतीय संविधान के भाग-17 में अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा हिंदी के संबंध में महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। अनुच्छेद 351 के तहत संघ का कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए और उसका विकास करे।
राजभाषा अधिनियम, 1963 (1967 में यथासंशोधित) की धारा 3(3) के अंतर्गत सामान्य आदेश, संकल्प, नियम, अधिसूचनाएं, प्रशासनिक या अन्य रिपोर्टें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है।
संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग नियम, 1976 के तहत पूरे देश को 'क', 'ख' और 'ग' क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। अहमदाबाद (गुजरात) क्षेत्र 'ख' के अंतर्गत आता है।
गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 का वार्षिक कार्यक्रम, जिसमें पत्राचार, टिप्पणी लेखन और वेबसाइटों के द्विभाषीकरण के लिए निर्धारित लक्ष्य दिए गए हैं।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा हिंदी में कार्य करने हेतु प्रोत्साहन योजनाएं, नराकास बैठकों के आयोजन एवं यूनिकोड फॉंट के प्रयोग से संबंधित अद्यतन कार्यालय ज्ञापन।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एवं अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), अहमदाबाद का परिचय और राजभाषा के क्षेत्र में उनका अग्रणी योगदान।
अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), अहमदाबाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। यह उपग्रह संचार, नौवहन, सुदूर संवेदन, मौसम विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अत्याधुनिक पेलोड एवं अनुप्रयोगों के विकास में कार्यरत है। सैक, अहमदाबाद नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास-2) का अध्यक्ष कार्यालय भी है, जो केंद्र सरकार के सभी स्थानीय कार्यालयों में राजभाषा के विकास एवं प्रसार में सक्रिय नेतृत्व कर रहा है।
Space Applications Centre (SAC), Ahmedabad is a premier R&D centre of Indian Space Research Organisation (ISRO). It focuses on the design and development of space-borne instruments for communication, navigation, earth observation, and planetary missions while leading Hindi implementation in Ahmedabad.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के तहत राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है। इसका विज़न अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है। इसरो अपने विभिन्न केंद्रों के माध्यम से न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में कीर्तिमान रच रहा है, बल्कि राजभाषा हिंदी के उत्कृष्ट प्रयोग का भी मानक स्थापित कर रहा है।
Indian Space Research Organisation (ISRO) is the national space agency under the Department of Space, Govt. of India. Dedicated to harnessing space technology for national development while pursuing planetary exploration, ISRO inspires global scientific excellence.
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अध्यक्ष, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास)
अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), इसरो
जोधपुर टेकरा, अहमदाबाद - 380015
Space Applications Centre (SAC), ISRO, Ahmedabad
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